सर्दियों में ख़ास गोमूत्र पान
- शरीर की पुष्टि के साथ शुद्धि भी आवश्यक है | गोमूत्र शरीर के सूक्ष्म-अतिसूक्ष्म स्त्रोतों में स्थित विकृत दोष व मल को मल–मुत्रादि के द्वारा बाहर निकाल देता है | इसमें स्थित कार्बोलिक एसिड कीटाणुओं व हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है | इससे रोगों का समूल उच्चाटन करने में सहायता मिलती है | गोमूत्र में निहित स्वर्णक्षार रसायन का कार्य करते है | अत: गोमूत्र के द्वारा शरीर की शुद्धि व पुष्टि दोनों कार्य पूर्ण होते है |
- सेवन विधि : प्रात: २५ से ४० मि.ली. (बच्चों को १०–१५ मि.ली.) गोमूत्र कपडे से सात बार छानकर पियें | इसके बाद २–३ घंटे तक कुछ न लें | ताम्रवर्णी गाय अथवा बछड़ी का मूत्र सर्वोत्तम माना गया है |
💥 विशेष : सुबह गोमूत्र में १०–१५ मि.ली. गिलोय का रस (अथवा २–३ ग्राम चूर्ण) मिलाकर पीना उत्कृष्ट रसायन है |
- ताजा गोमूत्र न मिलने पर गोझरण अर्क का प्रयोग करें | १०–१२ मि.ली. (बच्चों को ५–१० मि.ली.) गोझरण अर्क में पानी मिलाकर लें |
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