शिलाजीत एक टॉनिक भी है
यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहा जाता है। ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूर्य की प्रखर किरणों से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर यह बाहर निकल आता है जिसे बाद मेंइकट्ठा कर लिया जाता है। महर्षि चरक ने कहा कि पृथ्वी पर कोई भी ऐसा रोग नहीं है , जो उचित समय पर , उचित योगों के साथ , विधिपूर्वक शिलाजीत के उपयोग से नष्ट नहो सके। स्वस्थ मनुष्य यदि शिलाजीत का विधिपूर्वक उपयोग करता है , तो उत्तम बल मिलता है। वस्तुतः यह रसायन भी है। आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पति शिला , अर्थात पत्थर से मानीगयी है। ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघलने से जो एक प्रकार का स्राव होता है , उसे शिलाजतु कहा जाता है। इसी को ही शिलाजीत कहा गया है। शिलाजीत के गुण - धर्मः शिलाजीत कड़वा , कसैला...