शिलाजीत एक टॉनिक भी है

 



  • यह पत्थर की शिलाओं में ही पैदा होता है इसलिए इसे शिलाजीत कहा जाता है।



  • ज्येष्ठ और आषाढ़ के महीने में सूर्य की प्रखर किरणों से पवर्त की शिलाओं से लाख की तरह पिघल कर यह बाहर निकल आता है जिसे बाद मेंइकट्ठा कर लिया जाता है।



  •   महर्षि चरक ने कहा कि पृथ्वी पर कोई भी ऐसा रोग नहीं है, जो उचित समय पर, उचित योगों के साथ, विधिपूर्वक शिलाजीत के उपयोग से नष्ट नहो सके। 



  • स्वस्थ मनुष्य यदि शिलाजीत का विधिपूर्वक उपयोग करता है, तो उत्तम बल मिलता है। वस्तुतः यह रसायन भी है।

 

  • आयुर्वेद के अनुसार शिलाजीत की उत्पति शिला, अर्थात पत्थर से मानीगयी है।



  • ग्रीष्म ऋतु में सूर्य की प्रखर किरणों के ताप से पर्वत की चट्टानों के धातु अंश पिघलने से जो एक प्रकार का स्राव होता है, उसे शिलाजतु कहा जाता है। इसी को ही शिलाजीत कहा गया है।



शिलाजीत  के गुण-धर्मः 



  • शिलाजीत कड़वा, कसैला, उष्ण, वीर्य शोषण तथा छेदन करने वाला होताहै।



  • शिलाजीत देखने में तारकोल के समान काला और गाढ़ा पदार्थ होता है जो सूखने पर चमकीला हो जाता है। यह जल में घुलनशील है, किंतु एल्कोहोल क्लोरोफॉर्म तथा ईथर में नहीं घुलता।



  • यह चार प्रकार का होता है। रजत, स्वर्ण ,लौह तथा ताम्र शिलाजीत। प्रत्येक प्रकार की शिलाजीत के गुण अथवा लाभ अलग.अलग हैं।.


  रजत शिलाजीत


  •  का स्वाद चरपरा होता है। यह पित्त तथा कफ के विकारों को दूर करता है।


  स्वर्ण  शिलाजीत 

  • मधुर एवं कसैला और कड़वा होता है जो बात और पित्त जनित व्याधियों का शमन करता है।


 ताम्र  शिलाजीत 

  • कड़वा तथा सौम्य होता है। ताम्रशिलाजीत का स्वाद तीखा होता है। कफ जन्य रोगों के इलाज के लिए

यह आदर्श है क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है। समग्र रूप में शिलाजीत कफए चर्बीए मधुमेह एवं श्वास मिर्गी एवं बवासीर उन्माद एवं सूजन एवं कोढ़ एवं पथरी एवं पेट के कीड़े तथा कई अन्य प्रकार रोगों को नष्ट करने
में सहायक होता है।


  •  यह जरूरी नहीं है कि शिलाजीत का सेवन तभी किया जाए जब कि कोई बीमारी हो स्वस्थ मनुष्य भी इसका सेवन कर सकता है। इससे शरीर पुष्ट होता है और बल मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार सेवन के लिए मात्रा बारह रत्ती से दो रत्ती के बीच निर्धारित की जानी चाहिए।

  •   मात्रा का निर्धारण रोगी की शारीरिक स्थिति उसकी आयु और उसकी पाचन शक्ति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।


  • शिलाजीत का सेवन दूध और शहद के साथ सुबह सूयोर्दय से पहले कर लेना चाहिए इसके ठीक प्रकार पाचन के बाद अर्थात तीन.चार घंटे के बाद ही भोजन करना चाहिए।
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  • दिमागी ताकत के लिए प्रतिदिन एक चम्मच मक्खन के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है   इससे दिमागी थकावट नहीं होती।


  • मधुमेह( डायाबीटीस ) एवं प्रमेह और मूत्र संबंधी विकारों के निराकरण में शिलाजीत बेहद उपयोगी सिद्ध हुआ है।

  • एक चम्मच शहद एवं एक चम्मच त्रिफला चूर्ण के साथ लगभग दो रत्ती शिलाजीत का सेवन प्रमेह रोग को नष्ट कर देता है।

  •   इस मिश्रण का सेवन सूर्योदय से पहले ही करना चाहिए। मधुमेह के इलाज के लिए थोड़ी-.थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन लगातार शिलाजीत का सेवन तब तक किया जाना चाहिए जब तक कि लगभग पांच सेर मात्रा रोगी के
शरीर में पहुंच जाए। यह रोगी की स्थिति बहुत हद तक ठीक कर देता है।

  • मूत्रावरोध एवं पीड़ा जलन और प्रमेह के उपचार के लिए पीपल और छोटी इलायची को बराबर मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनालें एवं इस एक चम्मच चूर्ण के साथ शिलाजीत का सेवन लाभदायक होता है।

  •  यदि किसी को बार.बार पेशाब आएए रात को भी पेशाब के लिए बार.बार उठना पड़े तथा एक साथ भारी मात्रा में पेशाब आए तो समझ लें कि ये लक्षण बहुमूत्रता के हैं।

  • इस बीमारी को दूर करने के लिए शिलाजीत एवं बंग भस्म एवं छोट इलायची के दाने और वंश लोचन को समान मात्रा में लेकर शहद के साथ मिलाकर दो-.दो रत्ती की गोलियां बनाकर गर्म दूध के साथ इनका सेवन करें।

  • सुबह.शाम इसकी दो-.दो गोलियां लेना ही पयरप्त होता है। साथ ही इससे शरीर सुडौल और शक्तिशाली भी बनता है।

  • जिनके शरीर में गर्मी बढ़ी हुई हो उन्हें भी शिलाजीत से परहेज ही रखना चाहिए।

  • शिलाजीत के सेवन के दौरान मिर्च-मसाले एवं खटाई एवं मांस, मछली एवं अंड़े तथा शराब आदि का प्रयोग वर्जित है साथ ही कब्ज एवं मानसिक शोक तथा तनाव एवं रात में जागना एवं दिन में सोना तथा लगातार ज्यादा मात्रा में शारीरिक श्रम आदि से भी बचना चाहिए।


  • शिलाजीत का सेवन केवल कुछ दिनों तक सेवन किया जाता है तो इससे कोई नुकसान नहीं है।

  • स्वप्नदोष से ज्यादातर तो अविवाहित युवक ही पीड़ित पाए जाते हैं पर विवाहित पुरुष भी इससे अछूते नहीं हैं-

शुद्ध शिलाजीत- 25 ग्राम,
लौहभस्म- 10 ग्राम,
केशर- 2 ग्राम,
अम्बर- 2 ग्राम,
इन सबको मिलाकर खरल में खूब घुटाई करके महीन कर लें और दो -दो रत्तीकी गोलियां बना लें।

  •  एक-एक गोली सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से स्वप्न दोष होना तो बंद होता ही है, साथ ही पाचन -शक्ति, स्मरण शक्तिऔर शारीरिक शक्ति में भी वृद्धि होती है,

 इसलिए यह प्रयोग छात्र- छात्राओं के लिए भी उपयोगी है।यदि शीघ्रपतन के रोगी विवाहित पुरुषइसे सेवन करें तो उनकी यह व्याधि नष्ट होती है।

  •  शरीर में बल और पुष्टि आती है।

  • खटाई और खट्टे पदार्थों का सेवन बंद करके इन दोनों में से कोई एक नुस्खा कम से कम 60 दिन तक सेवन करना चाहिए।

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